यहाँ जो स्वप्न बिखरे हैं ,जरा उनको समेटूंगा ,
उसी के हाथ की कोई बुनी तकदीर लौटूंगा //
उसी से रूठना है फिर ,उसी को फिर मनाना है ,
उसी के प्यार की कोई ,नई तस्वीर खींचूंगा //
बहारों को पता है ये ,अगर फिर चूड़ियाँ खनकीं ,
उसी के रश्क में डूबी , शबे -बारात आयेगी //
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