निशानी जो बचीं उसकी ,जिलाती जा रहीं हैं वो,
दृगों में जो भरा पानी , बहाती जा रहीं हैं वो //
उसी की हलचलों में यह , समय कुछ बीत जाता है ,
कहीं दिल की दराजों में ,समाती जा रहीं हैं वो //
दिशाओं में महकती है , कहीं वो रात -रानी -सी ,
कदम हौले बदाती -सी ,दिले -नाशाद आएगी //
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