रविवार, 27 नवंबर 2011

निशानी जो बचीं उसकी ,जिलाती जा रहीं हैं वो,
दृगों में जो भरा पानी , बहाती जा रहीं हैं वो //
उसी की हलचलों में यह , समय कुछ बीत जाता है ,
कहीं दिल की दराजों में ,समाती जा रहीं हैं वो //
दिशाओं में महकती है , कहीं वो रात -रानी -सी ,
कदम हौले बदाती -सी ,दिले -नाशाद आएगी //

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

यहाँ जो स्वप्न बिखरे हैं ,जरा उनको समेटूंगा ,
उसी के हाथ की कोई बुनी तकदीर लौटूंगा //
उसी से रूठना है फिर ,उसी को फिर मनाना है ,
उसी के प्यार की कोई ,नई तस्वीर खींचूंगा //
बहारों को पता है ये ,अगर फिर चूड़ियाँ खनकीं ,
उसी के रश्क में डूबी , शबे -बारात आयेगी //

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

हवाओं से लिपट कर के , जरा मैंने कहा रुकना ,
अभी आँचल उड़ाती -सी उसी की याद आयेगी //
उसी की शोखियाँ होंगी ,उसी की मस्तियाँ होंगी ,
फिजाओं को लजाती -सी , हसीं सौगात आयेगी //

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

कितने दिन से दिल टूटा है , कितने दिन से नहीं मिले हो ,
इन नयनों की पलकों में तुम ,कितने दिन से नहीं खिले हो /
मीलों -मीलों धूप खिली थी ,जब तुम बाँहों में आये थे ,
कितने मौसम बदल -बदल कर ,इस धरती पर इठलाये थे ,
छलक चुकीं हैं झीलें कितनी ,कबसे ,अबतक नहीं मिले हो /
नदियों में जो जल बहता है ,शायद खारा हो जायेगा ,
बिन बरसे यह नभ का बादल ,धुंआ -धकारा हो जायेगा ,
इसे बरसने दो तुम आखिर ,आखिर कबसे नहीं मिले हो /
जाने वाले जब जाते हैं ,सामान दिलों का ले जाते हैं ,
इस मिट्टी में क्या बचता है, जान हमारी ले जाते हैं ,
फिर भी हमको जीना है कुछ , जीवन दोते नहीं मिले हो /
हवाओं से गुजर कर के , जरा मैंने कहा रुकना ,
अभी आँचल उड़ाती -सी उसी की याद आयेगी //
गुलाबी रंग उभरेंगे फिजाओं में उसी के बस ,
अभी उसके शबाबों की, कहानी याद आएगी //

रविवार, 20 नवंबर 2011

डूबकर जब तुम्हें देखा कि डूबते ही चले गये ,
समुन्दर थे निगाहों में कि सूखते ही चले गये //
अभी तक पता नहीं हमें गहराइयों का ,कहाँ हो ,
कहीं तो मिलोगे तल में कि दूंदते ही चले गये //

शनिवार, 19 नवंबर 2011

कोई गम न होता अगर आपसे दुश्मनी होती ,
आपने तो महोब्बत में भी दुश्मनी कर डाली //
आपके जीने का अन्दाज अजब लगा है जबसे ,
हमने अपने दुश्मनों से भी दोस्ती कर डाली //