geetonkebadal-[7]
सोमवार, 24 अक्टूबर 2011
एक हवा का झोंका भी पैगाम तुम्हारा लाया है /
सागर की लहरों पर जैसे चाँद उमड़ कर आया है /
मदमाता है , शरमाता है , ज्योतिर्मय हो जाता है /
जाने कितनी मीलों से ये ,सरक -सरक कर आया है /
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें